चारों पीठ के शंकराचार्य की घोषणा आने वाला नया सम्वत्सर गौमाता का होगाः संत गोपाल मणि महाराज

देहरादून। चारों पीठों के पूज्य शंकराचार्यों व देश के प्रतिष्ठित पूज्य सन्त महापुरुषों द्वारा स्वत-स्फूर्त गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा आंदोलन के तत्वावधान में गौ-संसद् के अंतर्गत 12 दिसम्बर को काशी (वाराणसी) से भारत के सभी प्रदेशों के लिए गौ-दूतों की नियुक्ति की गई है। आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के पश्चात आजादी की सूत्रधार, अमृत की प्रदाता, हमारी आस्था और श्रद्धा की मूल केंद्र, सात्विक (पॉजिटिव) ऊर्जा का स्रोत, राष्ट्र की सुख समृद्धि का मूल आधार, सुव्यवस्थित उत्तम विकास व अर्थव्यवस्था का मेरुदंड राष्ट्र-धर्म व संस्कृति के अविरल विकास की जननी गौमाता की हत्या का कलंक ऋषि-मुनियों की इस पवित्र तपोभूमि भारत से समाप्त करवाकर राष्ट्रमाता का सर्वोच्च सम्मान प्रदान करवाने हेतु हमारे राज्य के सभी संसदीय क्षेत्रों से गो राष्ट्रभक्त, कर्तव्यनिष्ठ संतों की नियुक्ति करके विक्रम संवत् 2080 माघ कृष्ण पक्ष एकादशी, दिन मंगलवार तदनुसार 6 फरवरी, 2024 ई. को श्री शंकराचार्य शिविर माघ मेला क्षेत्र, प्रयागराज तीर्थ में होने जा रही गो संसद् में पहुंचाने का निर्णय किया गया है। हमारे प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्रों में इस गो प्रतिष्ठा आंदोलन अभियान का वातावरण निर्माण करने, चारों पीठों के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य व राष्ट्र के प्रतिष्ठित संत महापुरुष गौक्रन्ति अग्रदूत संत गोपाल मणि महाराज और प्रधान पीठों के आचार्यों को आदेश तथा इस कार्य की सफलता का दायित्व हमें प्राप्त हुआ। प्रदेश के सभी प्रतिष्ठ संत-महापुरुषों व समस्त सनातनियों को पूज्य शंकराचार्यों  के आदेशानुसार एकजुट होकर इस स्वतरू स्फूर्त गो-प्रतिष्ठा आंदोलन को संपूर्ण देश में गति प्रदान करना है। 4 जनवरी को वृंदावन में सभी प्रदेशों के गौ भक्तों की एक विशेष गोसभा आयोजित होगी। जिसमें आंदोलन के विभिन्न पहलुओं को स्पष्टता देते हुए कमर कसी जाएगी। 15 जनवरी से 2023 जनवरी 2024 तक दिल्ली में गो- प्रतिष्ठा आंदोलन हेतु 11 गो- विशेषज्ञ समूहों की बैठक आयोजित की जाएगी। जिसमें गो-धर्म विशेषज्ञ, गो आर्थिकी की विशेषज्ञ, गो- ऊर्जा विशेषज्ञ  गो-कानून विशेषज्ञ, गो विज्ञान विशेषज्ञ, गौ-राजनीति विशेषज्ञ, गो-संगठन विशेषज्ञ गो-मीडिया विशेषज्ञ, गो- प्लेसमेंट (रोजगार) विशेषज्ञ गौ-व्यवहार विशेषज्ञ, गौ-पर्यावरण एवं पंचातत्व विशेषज्ञ होंगे। यदि इससे काम नहीं हुआ तो 30 जनवरी को को विशेषज्ञों  से प्राप्त आंकड़ों एवं निष्कर्षों के साथ गो-प्रतिष्ठा आंदोलन के लोगों को प्रतिनिधिमणडल देश के महामहिम राष्ट्रपति महोदय प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विविन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से जाकर मिलेंगे और इससे भी अगर काम नहीं हुआ तो फिर 6 फरवरी  को प्रयागराज तीर्थ में एक वृहद् गो-संसद का आयोजन होगा। जिसमें देशभर के सभी सांसदियों क्षेत्रों से एक-एक गांव प्रतिनिधि मनोनीत होकर उसे गो-संसद में सम्मिलित होगा और देश की जनता की ओर से प्रस्ताव पारित करेगा। यदि फिर भी काम नहीं हुआ तो आध्यात्मिक उपायों एवं दैविक शक्तियों को प्रधानता देते हुए इस पवित्र गो-आंदोलन की सफलता हेतु आह्मन द्वारा किया जाएगा, जिसमें स्वतरू  स्फूर्त गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के तत्वाधान में 10 फरवरी से 19 फरवरी तक दिल्ली के रामलीला मैदान में अश्वमेघ महायज्ञ किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूज्य रविंद्रपुरीजी महाराज, अध्यक्ष- अखिल भारतीय सनातन परिषद व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को दिया गया है। गौमाता राष्ट्रमाता आंदोलन के ध्वजवाहक संत गोपाल मणि महाराज जी ने चारों पीठ के शंकराचार्य के उक्त मतों को लेकर के आज देहरादून में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा की गौ माता राष्ट्र माता कहां आंदोलन अब प्रत्येक हिंदू के घर-घर पहुंच चुका है भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि भारत की राष्ट्रमाता केवल गौ ही है। संत मणि महाराज ने कहा कि यहां लड़ाई विधि सम्मत है संविधान के अनुच्छेद 25 की लड़ाई है जिसमें भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की आस्था के सम्मान की रक्षा करना भारत की सरकार का नैतिक कर्तव्य है तो इस देश में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं की आस्था भारत की आत्मा गाय में है लेकिन वह गौ माता आज भी दुर्भाग्य से हजारों की संख्या में कत्लखानों में कट रही है इसलिए आवश्यक है कि भारत की सरकार गौ को राष्ट्र माता का संवैधानिक सम्मान दें ताकि गाय के ऊपर कोई गलत दृष्टि ना डाल सके और गौवंश दर-दर ना भटके। आगे उन्होंने कहा कि यह बड़े सौभाग्य की बात है कि हमारे सनातन धर्म के मूल चारों पीठ के पूज्य शंकराचार्यौं का आशीर्वाद एवं पूर्ण समर्थन तथा दिशा निर्देश में अब यह आंदोलन आगे बढ़ रहा है और हमें विश्वास है कि जब सनातन की सत्ता ने गाय को राष्ट्र माता के रूप में स्वीकार कर लिया है तो देश की सरकार को भी अब गाय को राष्ट्रमाता के रूप में स्वीकार करना ही होगा इस अवसर पर आचार्य सीता शरण आचार्य विपिन जोशी आचार्य विजेंद्र ममगांई विकास पाटनी आचार्य शशिकांत दुबे राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी डॉक्टर रामभूषण बिजलवाण प्रदेश अध्यक्ष भारतीय गौ क्रांति मंच शूरवीर सिंह मतुड़ा पूर्व चारधाम उपाध्यक्ष यमुनोत्री रावल पवन उनियाल आचार्य राकेश सेमवाल सूरत राम डंगवाल आनंद सिंह रावत यशवंत सिंह रावत मंजू नेगी माहेश्वरी जोशी आदि कई गणमान्य कन उपस्थित रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

राज्योत्सव समारोह में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का किया स्वागत एवं अभिनंदन देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित राज्योत्सव समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ से पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री का देवभूमि आगमन प्रदेशवासियों के लिए खुशी और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की एकता और अखंडता की मजबूत नींव रखी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में देश ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने, नागरिकता संशोधन अधिनियम तथा तीन नए आपराधिक कानूनों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूती प्रदान की गई है। आतंकवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से देश में शांति एवं विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वहीं, सहकार से समृद्धि अभियान के माध्यम से किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए उत्तराखण्ड पुलिस के समस्त अधिकारियों, जवानों और प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 नवंबर को उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का सम्मान करते हुए पृथक उत्तराखण्ड राज्य के सपने को साकार किया था। आज राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और सहयोग से राज्य आंदोलनकारियों की आकांक्षाओं के अनुरूप उत्तराखण्ड को विकसित और समृद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।