अन्वेंषण का केंद्र बनता राज्य का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में घनघोर अंधकार से शिक्षा के उजाले की ओर: जिला प्रशासन की सार्थक पहल

आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर से 154 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े

देहरादून: जिले में संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC), जहां भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों का माइंड रिफॉर्मेशन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, अब शैक्षणिक शोध एवं सामाजिक अध्ययन का केंद्र भी बनता जा रहा है। देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राएं यहां भ्रमण कर न केवल शोध कार्य कर रहे हैं, बल्कि बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

इसी क्रम में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने डॉ. सुरेन्द्र यादव (सहायक प्रोफेसर) के नेतृत्व में इंटेंसिव केयर सेंटर का भ्रमण किया और बच्चों के साथ संवाद स्थापित किया।

इस अवसर पर ICC के बच्चों ने अतिथियों का स्वयं के हाथों से बनाए गए स्वागत कार्ड एवं सुंदर स्वागत नृत्य के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया। इस सहभागिता से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, प्रस्तुति कौशल एवं टीमवर्क के सकारात्मक विकास की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

यह पहल न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि समाज और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवेदनशील साझेदारी का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने जैसी परिस्थितियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेलकूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

परिस्थितियों की मार झेल रहे, सड़कों पर बिखरे बचपन से भिक्षा का कटोरा छीनकर शिक्षा की कलम सौंपने का यह मानवीय प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहा है। जिला प्रशासन का यह इंटेंसिव केयर सेंटर आज आशा की किरण बन चुका है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए 27 बच्चों को शनिवार को इंटेंसिव केयर सेंटर से विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया। अब तक भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने में संलिप्त कुल 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। दिसंबर 2024 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को रखा गया। इनमें 83 बच्चे भिक्षावृत्ति, 117 बच्चे कूड़ा बीनने तथा 67 बच्चे बालश्रम से रेस्क्यू किए गए। बच्चों को शिक्षा से जोड़ने हेतु इंटेंसिव केयर सेंटर में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाया गया। जिलाधिकारी के प्रयासों से यहां पढ़ाई की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, व्यायाम, मनोरंजन एवं काउंसलिंग की सुविधाएं प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। इस संपूर्ण कार्यक्रम की जिलाधिकारी द्वारा नियमित एवं व्यक्तिगत मॉनिटरिंग की गई। मानसिक रूप से सशक्त किए जाने के उपरांत 154 बच्चों का चरणबद्ध तरीके से विभिन्न सरकारी विद्यालयों में दाखिला कराया गया है। जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि “शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन तक निरंतर जारी रहेगा। रुकना कोई विकल्प नहीं है।

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